ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर विलायती ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर तुर्की की जनता को मुबारकबाद देते हुए इसे एक अहम क़दम क़रार दिया है।
ग़ौरतलब है कि हागिया सोफ़िया का निर्माण छठी शताब्दी में एक चर्च के रूप में किया गया था, जिसे 1453 में पहले उस्मानी शासक ने मस्जिद में बदल दिया था।
लेकिन 1934 में आधुनिक तुर्की के पहले राष्ट्रपति कमाल अतातुर्क ने इस इमारत को एक संग्राहलय में बदलने का फ़ैसला किया।
10 जुलाई को तुर्की की एक अदालत के फ़ैसले के बाद, राष्ट्रपति अर्दोगान ने इसे नमाज़ के लिए खोलने का आदेश दिया और क़रीब 84 वर्ष बाद एक बार फिर इसमें जुमे और बक़रईद की नमाज़ अदा की गई।
विलायती ने अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के उस बयान की भी निंदा की, जिसमें उन्होंने अंकारा से मांग की थी कि हागिया सोफ़िया की संग्रहलय की स्थिति को फिर से बहाल किया जाए।
ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार का कहना था कि पोम्पियो के पूर्वजों ने दुनिया भर के संग्राहलयों को चर्चों में बदल दिया था। हागिया सोफ़िया पिछले 500 साल से मस्जिद थी, इसलिए क़यामत तक वह मस्जिद ही रहेगी।
तुर्क सरकार का कहना है कि हागिया सोफ़िया मस्जिद के दरवाज़े पहले की तरह पर्यटकों के लिए खुले रहेंगे।